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 “माता-पिता की देखभाल बनेगी कर्मचारी का अधिकार: ‘पवित्र बंधन अवकाश विधेयक 2026’ में 45 दिन की सवेतन छुट्टी का प्रावधान”

पवित्र बंधन अवकाश विधेयक 2026: माता-पिता की सेवा को कानूनी समर्थन

सरकार का उद्देश्य

भारत में बढ़ती बुजुर्ग आबादी और कर्मचारियों पर बढ़ते पारिवारिक दबाव को देखते हुए “पवित्र बंधन (माता-पिता देखभाल अवकाश) विधेयक, 2026” लाया गया है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल के लिए सवेतन अवकाश प्रदान करना है।


मुख्य प्रावधान (Key Provisions)

  • कर्मचारियों को पूरे सेवाकाल में अधिकतम 45 दिन का Parent Care Leave मिलेगा।
  • यह अवकाश पूरी तरह सवेतन (Full Pay) होगा।
  • यह छुट्टी अन्य छुट्टियों से नहीं काटी जाएगी
  • अवकाश का लाभ 60 वर्ष से अधिक आयु वाले माता-पिता की देखभाल के लिए मिलेगा।

किन माता-पिता को शामिल किया गया

श्रेणीविवरण
जैविक माता-पिताBiological Parents
सौतेले माता-पिताStep Parents
दत्तक माता-पिताAdoptive Parents
सास-ससुरIn-laws (Age 60+)

किन संस्थानों पर लागू होगा

संस्थान का प्रकारलागू होने की स्थिति
केंद्र सरकार विभागलागू
राज्य सरकार विभागलागू
सार्वजनिक उपक्रमलागू
निजी कंपनियांजहां 10 या अधिक कर्मचारी हों

आवेदन की प्रक्रिया

  • मेडिकल सर्टिफिकेट या अस्पताल के दस्तावेज देना आवश्यक।
  • आपात स्थिति में तुरंत छुट्टी ली जा सकती है।
  • दस्तावेज 7 कार्य दिवसों के भीतर जमा करने होंगे।

कर्मचारी संरक्षण

  • अवकाश लेने पर प्रमोशन या इंक्रीमेंट में भेदभाव नहीं होगा।
  • ट्रांसफर या सेवा शर्तों में भी कोई नुकसान नहीं होगा।

नियोक्ता के लिए दंड

उल्लंघनजुर्माना
छुट्टी देने से मना करना₹50,000
कर्मचारी को परेशान करना₹2,00,000 तक

विधेयक लाने के कारण

  • भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी
  • सैंडविच जनरेशन पर मानसिक और आर्थिक दबाव।
  • भारतीय संस्कृति के मूल्यों “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव” का संरक्षण।