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 बजट जारी होने के बाद भी 52 जिलों में आरटीई शुल्क प्रतिपूर्ति खर्च नहीं

आरटीई शुल्क प्रतिपूर्ति में लापरवाही, 52 जिलों ने नहीं खर्च की राशि

लखनऊ:

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत गरीब परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिले के बदले सरकार स्कूलों को शुल्क प्रतिपूर्ति देती है। शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए सरकार ने जिलों को 276 करोड़ रुपये जारी किए, लेकिन जिलों ने इसका बहुत कम उपयोग किया।



कुल बजट बनाम खर्च

विवरणराशि
कुल जारी धनराशि276 करोड़ रुपये
खर्च की गई धनराशि89.40 करोड़ रुपये
खर्च प्रतिशत32.45%
बिना खर्च वाले जिले52

अधिकारियों को फटकार

  • बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने लापरवाही पर नाराजगी जताई।

  • कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को चेतावनी दी गई।

  • निजी स्कूलों को समय पर भुगतान न होने से समस्या बढ़ रही है।


जिन जिलों ने खर्च में दिखाई रुचि

जिलाखर्च स्थिति
प्रयागराज100%
बलिया100%
गौतमबुद्ध नगर92%
बांदालगभग 85%
सुल्तानपुरलगभग 83%

60% तक खर्च करने वाले 12 जिले

इन जिलों ने 100% से 59.26% तक धनराशि खर्च की—

  • गौतमबुद्ध नगर

  • बांदा

  • सुल्तानपुर

  • मैनपुरी

  • बुलंदशहर

  • प्रतापगढ़

  • सीतापुर

  • बागपत

  • कुशीनगर

  • बस्ती

  • गाजियाबाद

  • गोरखपुर


मुख्य बिंदु

  • 52 जिलों ने एक भी रुपया खर्च नहीं किया

  • केवल 23 जिलों ने भुगतान प्रक्रिया में रुचि दिखाई।

  • कई जिलों में निजी स्कूलों को भुगतान लंबित है।